राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला, विधवा पुत्रवधु को 3 महीने में नौकरी देने का दिया आदेश
जोधपुर . राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने सास की मौत के बाद उसकी पुत्र-वधू को तीन महीने में विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। सास की मौत के करीब दस साल बाद पुत्रवधु की सरकारी नौकरी का रास्ता साफ हुआ है।

जोधपुर . राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने सास की मौत के बाद उसकी पुत्र-वधू को तीन महीने में विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति देने के आदेश दिए हैं। सास की मौत के करीब दस साल बाद पुत्रवधु की सरकारी नौकरी का रास्ता साफ हुआ है। विभागीय अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक चली लंबी कवायद के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर पुत्रवधु को यह न्याय मिला। हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश राजेंद्र प्रकाश सोनी ने अपने फैसले में कहा कि तीन माह में अपीलार्थी दुर्गादेवी मईड़ा को नियुक्ति प्रदान की जाए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में पुत्रवधु दुर्गादेवी को अनुकम्पा आधार पर नियुक्ति के योग्य माना है। दुर्गादेवी को परिवार की आवश्यक सदस्य के रूप में स्वीकार कर मृतका सास गवरी देवी के स्थान पर तीन माह में नियुक्ति देने को कहा है। हाईकोर्ट के एडवोकेट रामदेव पोटलिया ने दुर्गादेवी की ओर से याचिका दायर की थी। किसी राजकीय कर्मचारी की मत्यु के बाद अनुकम्पा आधार पर नियुक्ति मामले में मृतक कर्मचारी के आश्रित व अनुकम्पा नियुक्ति नियम 1996 के अनुसार पुत्रवधु को योग्य नहीं मानने के बाद इस मामलेे में हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण है।
यह है मामला
एडवोकेट पोटलिया ने बताया कि बांसवाड़ा निवासी गवरी देवी पीएचईडी में चतुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत थी। उसके पुत्र शंकर व बसन्त की मत्यु गवरी देवी से पहले वर्ष 2006 व 2007 में हो गई थी। गवरी देवी की पुत्री शादी होने पर अपने पति के साथ ससुराल में रहकर जीवन यापन कर रही थी। गवरी देवी की नौकरी के दौरान वर्ष 2013 में मत्यु हो गई थी। उसकी दूसरी विधवा पुत्रवधू व विवाहित पुत्री ने दुर्गादेवी मईड़ा को मृतका के स्थान परअनुकम्पा नियुक्ति देने के लिए अपनी सहमति दी। वर्ष 2013 व 2014 में पीएचईडी विभाग के सक्षम अधिकारियों ने दुर्गादेवी मईड़ा के आवेदन को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि पुत्रवधू मृतक कर्मचारी के आश्रित की श्रेणी में नहीं होने से अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार नहीं है। इसके बाद जोधपुर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भी दुर्गादेवी की याचिका खारिज कर दी। डबल बैंच के समक्ष इस अपील की सुनवाई होने पर दुर्गादेवी को नौकरी देने का आदेश दिया गया।
What's Your Reaction?






